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Thursday, 1 August 2013

मेगी आसनानी की गज़लें और नज्में

गज़लें और नज्में 


सारे जग से रूठ जाना चाहती हूँ
हा, मगर तुमको मनाना चाहती हूँ

 प्यार की छत हो,दिवारे ऐतबार की
बस मैं ऐसा आशियाना चाहती हूँ

इक खुशी गर तुं जो मुझको दें सके तो
सारे गम को भूल जाना चाहती हूँ

बस तेरा ही प्यार मांगू ज़िन्दगी में
मैं कहा कोई ख़जाना चाहती हूँ

हा, वतन को छोड़ा बरसो हो चूके है
अब मैं लेकिन लौट आना चाहती हूँ

पाया क्या है और खोया क्या है मैंने
सारी बाते भूल जाना चाहती हूँ 
* * *

कुछ इस तरह मजबूर हो ये बात है गलत
तुम मुझसे इतना दूर हो ये बात है गलत

बेख़ुद हुई है दुनिया, चल, संभाल ले इसे
हम भी नशे में चूर हो ये बात है गलत

रुक जाओ मेरे ख़्वाब में कुछ देर के लिए
अब इतने भी मगरूर हो ये बात है गलत

अपनी नज़र पे भी ज़रा सा गौर कीजिये
सब मेरा ही कुसूर हो ये बात है गलत

दिन भर ख़ुदाया एक अँधेरा सही मगर
ये चाँद भी बेनूर हो ये बात है गलत
* * *

रात तो रात है
कैसे ज़ज़्बात है

वो मिले है कहाँ ?
बस मुलाकात है

ज़िन्दगी, प्यार, तुम
सब खयालात है

दिन को छेड़ो ना वो
रात की बात है

ये जहाँ, वो जहाँ
इक तेरी ज़ात है
* * *

-- नज्में --

सुना है मेरे देश में बारिश का मौसम शरु हो गया है
और मैं यहाँ परदेश की गर्मी में
ac में बंद कमरे में,
उम्र की उस एक बारिश के ख़याल से
भीग जाती हूँ
जो अब तक मैनें नहीं देखी ….
* * *
हर रोज़ की तरह आज का सूरज भी नया लगता है
इसकी धीरे धीरे बढ़ती तपिश
हमारे अंग अंग में सुर्ख ताजगी भरती है
की हम अपनी सोच को फैसलों में बदल सके
ठिठुरते हुए अपने प्यार और इंसानियत का हाल बदल सके,
तुम यूँ ख़ामोश, उदास सोते रहोगे तो कुछ नहीं होगा
जो भी करना है हमें ही करना है
इन फूलों में कभी न मिटने वाली ख़ुशबू है
आओ 
हम वफ़ा, इंसानियत, प्यार की ख़ुशबू दूर तक फैला दे….
चलो उठो…
मैं इश्क़ की दरगाह से महोब्बत के फ़ूल लायी हूँ ….
* * *

मैं वो लडकी हु
जो हरपल को जी भर के जी लेती है
न कभी मुड के पीछे देखती है
और न ही कभी
आनेवाले कल के लिए इतना
दूर का सोचती है
अगर आज जब उसने
दूर से सदा दी
अपनी हसती हुई आँखों से पुकारा
प्यार के दो मीठे बोल कहे
तो ये दिल
आनेवाले कल से हिरासां हो गया
और न जाने क्यों
मैं कल के लिए बहूत दूर का सोचने लगी ……  !!!
* * *
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मेगी आसनानी